आईपीसी धारा 34 क्या है? धारा 34 कब और क्यों लगाई जाती है?

|| आईपीसी धारा 34 क्या है? | What is IPC 34 | आईपीसी धारा 34 के उदाहरण | IPC Section 34 Examples | धारा 34 के मुख्य तत्व (Elements of IPC 34 | धारा 34 में वकील की जरूरत क्यों होती है। | Why is lawyer important for IPC section 34 ||

पूरे विश्व के हर देश में हर प्रकार के लोग बसते हैं। कुछ अच्छे लोग होते हैं कुछ बुरे लोग भी होते हैं। इस कारण विभिन्न विभिन्न प्रकार के कानून बुरे लोगों से बचने के लिए बनाए जाते हैं। ताकि गलती करने वाले डर हो किसी भी प्रकार के अपराध करने से उन्हें कठोर दंड मिल सकता है। बड़े तथा छोटे सभी  देशों में अपराध बहुत बड़े स्तर पर होती हैं।

जैसे सीरिया, अफगानिस्तान (syria and afghanistan are engaged in crimes due to taliban) को आपराधिक तत्व  ने बिल्कुल घेर लिया है। वहां पर किसी भी प्रकार का कानून नहीं चलता जिस कारण उस देश के लोग बहुत परेशान हैं क्योंकि आतंकवादी बिना किसी कानून यह बिना किसी अपराध के किसी भी व्यक्ति को जेल में डाल देते हैं या किसी भी महिला के साथ ज्यादती करने का प्रयास करता है।जिस कारण किसी भी देश में कानून होना बहुत आवश्यक है।

कानून की व्यवस्था ठीक होने से देश की प्रगति संभव हो पाती है तथा किसी के भी साथ अपराधी को अपराध करने से डर भी होता है तथा एक सभ्य (through laws society become disciplined) समाज का निर्माण होता है। बाहर के देशों से भी लोग एक शांतिप्रिय देश में आना पसंद करते हैं जिससे उस देश की प्रगति और तेज हो जाती है तथा उस देश की छवि पूरी दुनिया में अच्छी बनकर आती है। इसी कारण देश को चलाने वाला व्यक्ति समझदार एवं सभी के प्रति समान नजरिए करने वाला होना चाहिए।

 इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको आईपीसी (IPC – INDIAN PENAL CODE) की धारा 34 के विषय में जानकारी प्रदान करेंगे इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताएंगे धारा 34 क्या है, इसके अंदर किस प्रकार की सजा का प्रावधान है, किन-किन अपराधों के अंतर्गत इसे सजा दी जा सकती है यदि आप भी धारा 34 के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे आर्टिकल को पूरा  पड़े।

आईपीसी धारा 34 क्या है? (What is IPC 34 )

भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने या बहुत सारे व्यक्तियों में किसी आपराधिक कृत्य को एक इरादे के साथ अंजाम दिया है तो वह सारे व्यक्ति जो इस कृत्य में शामिल होंगे वह सजा के पात्र हैं (group of people do crime through particular intention) तथा उन्हें अपराध के लिए सजा दी जाएगी। भारतीय दंड संहिता की धारा इसमें यदि किसी व्यक्ति ने कोई एक ही अपराध किया है  एक अपराध के लिए धारा 34 के अंतर्गत सजा नहीं दी जाती परंतु यदि किसी अपराधी ने एक अपराध के बाद एक और अपराध किया है तो उसे धारा 34 के अनुसार सजा दी जाती है।

आईपीसी धारा 34 क्या है धारा 34 कब और क्यों लगाई जाती है

धारा 34 के अनुसार उन व्यक्तियों को सजा दी जा सकती जिन्होंने किसी आपराधिक इरादे से कार्य को अंजाम दिया है अपराध में  बहुत सारे लोगों को शामिल किया है। धारा 34 के अनुसार वह व्यक्ति भी सजा के पात्र होंगे। जिन्होंने एक के बाद एक दो अपराध को अंजाम दिया है एक अपराध के लिए धारा 34 नहीं लगाई जा सकती एक गुट के द्वारा किसी निश्चित इरादे से किसी अपराध को अंजाम देना तथा गुट के सभी मेंबर को उस इरादे के विषय में ज्ञान हो तो वह सभी व्यक्ति सजा का पात्र होंगे तथा उन्हें सजा दी जाएगी।

किसी भी अपराधी पर सिर्फ धारा 34 नहीं लगाई जा सकती यदि किसी व्यक्ति पर धारा 34 लगी हुई है।(section 34 is not charged for single crime either one another section is charged on person) तो हमें पहले से लिए ज्ञान होना चाहिए उसने कोई और अपराध किया है।

तथा उसके ऊपर एक और धारा लगी हुई है क्योंकि किसी एक अपराध के लिए धारा 34 किसी पर भी नहीं लगाई बल्कि यदि पहले से एक आरा अपराधी पर चल रही है तो धारा 34 शादी पर लगाइए यह कानून 1860 में भारतीय दंड संहिता में लिखे गए थे। इन कानूनों का पालन भारत में करना अनिवार्य है तथा पूरी न्याय व्यवस्था भारतीय दंड संहिता के अनुसार ही चलती है जिससे देश में कानून व्यवस्था ठीक बनी रहती है एवं देश की प्रगति संभव हो पाती है।

आईपीसी धारा 34 के उदाहरण (IPC Section 34 Examples)

हम आपको उदाहरण के माध्यम से आईपीसी की धारा 34 के विषय में समझाते हैं उदाहरण के द्वारा कानूनों की समझ अच्छी तथा सहज तरीके से हो जाती है।

उदाहरण के लिए 4 व्यक्तियों के किसी गुट में किसी व्यक्ति को मारने की साजिश की है। जिस व्यक्ति को  मारने की साजिश की गई है वह बाजार में किसी काम से गया है। चारों अपराधी उस व्यक्ति की ताक लगाए रहते हैं तथा बाजार में उस व्यक्ति पर हमला करते हैं। और उसे मारने का प्रयास करते हैं 4 अपराधी बाजार में उस व्यक्ति को घरते हैं तथा एक अपराधी उस व्यक्ति पर जानलेवा हमला करता है।

जानलेवा हमला करते समय अपराधी व्यक्ति पर गोली चलाता है। गोली व्यक्ति के पैर में लगती है तथा तीनों लोगों से झपट कर वहां से भागने का प्रयास करता है वह चारों अपराधी उस व्यक्ति को पकड़ने का प्रयास करते हैं परंतु वह व्यक्ति शोर मचा देता है एवं तब तक वहां पर भीड़ इकट्ठी हो जाती है जिस कारण डर कर चारों अपराधी वहां से भाग जाते हैं।

ऊपर दिए हुए उदाहरण है एक अपराधी ने उस व्यक्ति को घायल किया भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (punishment given for crime is under section 323)के अंतर्गत अपराधी सजा का भागी होगा। परंतु जो अन्य सेम व्यक्ति इस अपराधी के साथ इसी मकसद से आए थे। कि वह व्यक्ति को मारेंगे वह भी धारा 323 के अनुसार बराबर सजा के हकदार होंगे क्योंकि उनका व्यवहार उस अपराधी की ही तरह बिल्कुल समान था।

ऊपर दिए हुए उदाहरण के माध्यम से हमने आपको समझाया की धारा 34 के अंतर्गत किस प्रकार से सजा का प्रावधान किया गया है तथा इसके अंतर्गत किस प्रकार के अपराध आते हैं।

धारा 34 के मुख्य तत्व (Elements of IPC 34 )

भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के अनुसार मुख्य तत्व आते हैं वह ननिम्न है।

  • किसी प्रकार की अपराधिक गतिविधि (criminal  activity) को अंजाम दिया गया हो ।
  • अपराधिक गतिविधि में दो या दो से अधिक लोग सम्मिलित हैं।(2 or more people are involvतथा सभी का इरादा अपराधी की तरह समान हो।
  • सभी व्यक्तियों की अपराध करने में समान भागीदारी है तथा सभी ने आपराधिक कृत्य को करने में कोई सहायता प्रदान की है।

धारा 34 में वकील की जरूरत क्यों होती है।(Why is lawyer important for IPC section 34)

भारतीय दंड संहिता की धारा चांदी के अनुसार किसी एक अपराध के लिए धारा 34 नहीं लगाई जा सकती है। बल्कि पहले से किसी अपराधी पर किसी अन्य सजा की धारा लगी हूं। तभी धारा 34 लगाई जा सकती है धारा 34 में दी जाने वाली सजा सभी के लिए समान होती है जिन जिन व्यक्तियों पर धारा 34 लगती है उन सभी व्यक्तियों पर मुश्किल सजा का प्रावधान होता है। इस धारा के अनुसार अपराधियों का एक समूह अपराध को अंजाम देता है इसमें किसी एक व्यक्ति के द्वारा मुख्य अपराध किया जाता है परंतु जो भी व्यक्ति उसके साथ होते हैं उन्हें भी समान सजा दी जाती है।

इस कारण धारा 34 में लगाए गए किसी को जीत पाना बहुत मुश्किल होता है जिन पर धारा 34 लगाई जाती है उनका बच पाना या निर्दोष साबित हो पाना काफी पेचीदा है। जिस कारण धारा 34 के अंतर्गत आने वाले अपराधों में वकील की आवश्यकता है। (lawyer is important because he knows properly about his field do  many wonderful jobs previously he knows how to represent the case in front of judge) बहुत अधिक होती है।

क्योंकि वह अपने क्षेत्र में बहुत जानकार होता है तथा उसने पहले भी इस प्रकार के विभिन्न देशों को लड़ा अजीता होता है। अंदाजा होता है। इस प्रकार के किस को किस प्रकार जीता जा सकता है ।इस कारण वकील की जरूरत बहुत आवश्यक है। क्योंकि एक सामान्य इंसान को इस बात का अंदाजा नहीं होता की केस में आने वाली मुश्किल है तथा उसके दांव वेद कितने हम हो सकते हैं।

इस कारण जो अपने क्षेत्र में पारंगत था जिसे कानून के विषय में संपूर्ण ज्ञान है तथा इस प्रकार के केस्को पहले भी लड़ चुका हूं एवं जीत चुका इस प्रकार की व्यक्ति को भी केस लड़ने के लिए आगे करना चाहिए।

NOTE. भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के विषय में हमें ध्यान रखना चाहिए कि यह कोई छोटी धारा नहीं है यदि यह धारा किसी पर भी लग गई। तो वह किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी में बैठने के योग्य नहीं है। (if any person is charged with section 34 then he is never eligible for any government job)तथा किसी भी सरकारी संस्थान में उसे नहीं बैठाला जाएगा। किसी भी पढ़ने लिखने वाले व्यक्ति जो सरकारी नौकरी करना चाहता हूं यदि यह धारा उस पर लग गई है तो उसका भविष्य खराब हो सकता है पूरे जीवन भर वह किसी भी सरकारी एग्जाम को नहीं दे पाएगा किसी भी सरकारी संस्थान नौकरी नहीं कर पाएंगे।

असल उदाहरण: तेजराम बनाम राज्य के केस में दो अपराधियों ने मिलकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी जिसमें एक अपराधी ने धारदार हथियार से उस व्यक्ति पर हमला किया तथा दूसरे अपराधी ने लाठी-डंडों के साथ उस व्यक्ति पर हमला किया मेडिकल रिपोर्ट से यह पता चला कि व्यक्ति की हत्या धारदार हथियार के लगने के कारण हुई जिस अपराधी ने धारदार हथियार से हमला किया उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 304/34 के अंतर्गत दोषी ठहराया गया। परंतु दूसरे अपराधी जिसने लाठी से हमला किया उसका भी इरादा व्यक्ति को मारने का ही था जिस कारण उसे भी भारतीय दंड संहिता की धारा 304 /34 के अंतर्गत समान सजा का प्रावधान किया गया।

धारा 34 से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर

धारा 34 के अंतर्गत किस प्रकार के अपराध आते हैं?

धारा 34 के अंतर्गत यदि किसी एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह में किसी आपराधिक कृत्य को एक इरादे के साथ अंजाम दिया है तो वह व्यक्ति तथा उसका साथ देने वाले सभी व्यक्ति एक ही प्रकार की सजा के पात्र होंगे।

अगर किसी व्यक्ति पर धारा 34 लग जाती है तो उसके क्या परिणाम होते हैं?

अगर किसी व्यक्ति पर धारा 34 कर जाती है तो उसे कभी भी किसी सरकारी संस्था में कार्यरत नहीं हो पाएगा तथा किसी भी प्रकार के सरकारी परीक्षा को नहीं दे पाएगा।

धारा 34 किस प्रकार से लगाई जाती है?

धारा 34 कभी भी किसी एक अपराध के लिए नहीं लगाई जाती यदि पहले से ही किसी अपराधी पर किसी अन्य नारा को लगाया गया है तभी धारा 34 पर लगाई जा सकती है।

धारा 34 से संबंधित किसी असल उदाहरण के विषय में बताइए?

भारतीय दंड संहिता की धारा 34 का असल उदाहरण तेजराम बनाम सरकार है इस केस में मुख्य अपराधी के साथ-साथ लाठी से हमला करने वाले दूसरे अपराधी को भी धारदार हथियार से हमला करने वाले अपराधी की ही तरह सजा दी जाती है।

धारा 34 के अंतर्गत कितने मुख्य तत्व आते हैं?

भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के अंतर्गत 3 मुख्य तथा आते हैं जैसे किसी भी प्रकार की अपराधिक गतिविधि, व्यक्तियों के गुट द्वारा किसी आपराधिक कृत्य को अंजाम देना, तथा अपराध में भागीदार सभी व्यक्तियों को समान सजा का प्रावधान है ।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के विषय में जानकारी प्रदान की है जैसे यह धारा क्या है इसमें किस प्रकार की सजा है धारा 34 के अंतर्गत मुख्य तत्व कौन कौन से हैं तथा इसमें वकील की आवश्यकता क्यों पड़ती है यह सभी पॉइंट ऊपर दिए हुए आर्टिकल में कवर किए गए हैं।

यदि आप भी आईपीसी की धारा 34 के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे आर्टिकल को पूरा पड़ सकते हैं। यदि आपको आर्टिकल से संबंधित किसी प्रकार की समस्या है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं हमें आपका उत्तर देना है प्रसन्नता होगी तथा हमारे आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

13 thoughts on “आईपीसी धारा 34 क्या है? धारा 34 कब और क्यों लगाई जाती है?”

  1. सामान्य मारपीट की घटना में धारा २९४, ३४ एवं ५०६ लगा दी, जबकि अपराधी का इससे पहले कोई भी आपराधिक रिकोर्ड नहीं है।
    क्या धारा ३४ जायज़ है ?

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  2. लेकिन जब कोई फर्जी लगवा दे धारा ३४, चौकी पे या विवेचनाधिकारी को घूस देकर तब पीड़ित क्या करे जिसके ऊपर धारा ३४ लगवाई गयी है

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  3. यदि चार व्यक्तियों में से किसी एक ने किसी के हाथ की हड्डी में फैक्चर कर दिया है तो क्या धारा 34 चारों पर लगेगी जो कि इनका पहला ही कैसे हैं

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  4. क्या चार व्यक्तियों की किसी से लड़ाई होने पर पहली बार में ही धारा 34 के अपराधी हो जाते हैं

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    • जी हाँ अगर किसी के साथ कोई समूह बनाकर उसे आहत करता है तो वह धारा 34 के अपराधी हो जाते हैं.

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  5. मेरे पुरे परीवार जिसमें में मेरा बेटा व मेरी तीन शादी सुदा बेटीयों के खिलाफ झूठी पुलिस रिपोर्ट करा दी है दहैज प्रताड़ना में जिसमें निम्नलिखित धाराएँ लगाइ गयी है 498 ए/323/५0६/34 जबकि ये घटना 20/11/2020 बताकर रिपोर्ट 20/11/2024 कराइ गयी उसके पहले 04/04/2022 में 125 के तहत महिला न्यायालय मे लगाया जो विचाराधीन है।

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  6. रिपोर्ट की तारक 02/04/2024 है उसे सही करके पडा जये

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  7. मेरी पुत्र वधू ने हमारे उपर दहैज प्रताड़ना की झठी रिपोर्ट दर्ज करवाई गयी है जिसमें निम्न धाराये लगाइ गयी है 498 ए 323/506/34 ये रिपोर्ट 02/04/2024 को लिखवाई गयी है व घटना 20/11/2020 की बताई गई है उसके पहलें धारा125 मे 04/04/2022 को कुटुबं न्यायालय मे विचाराधीन है।

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  8. यदि कोई व्यक्ति पहले से सरकारी नौकरी में हैं और उस पर 34 लगा तो क्या होगा

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